पाठ्यक्रम: GS3/ विज्ञान और प्रौद्योगिकी
संदर्भ
- भारत की वैश्विक नवाचार सूचकांक में हुई प्रगति के अनुरूप अब स्वदेशी अनुसंधान एवं विकास, व्यावसायिक परिपक्वता तथा घरेलू बौद्धिक संपदा स्वामित्व को और अधिक सुदृढ़ करने की आवश्यकता है।
परिचय
- वैश्विक नवाचार सूचकांक अनुसंधान एवं विकास के परिणामों का आकलन करने वाला एक वैश्विक सूचकांक है, जिसका प्रकाशन विश्व बौद्धिक संपदा संगठन द्वारा किया जाता है।
- वर्ष 2015 में भारत की वैश्विक नवाचार सूचकांक में 81वीं रैंक थी, जो वर्ष 2025 में बढ़कर 38वें स्थान पर पहुँच गई।
- भारत निम्न-मध्यम आय वाले देशों तथा मध्य एवं दक्षिण एशियाई क्षेत्र में प्रथम स्थान पर है।
- वर्ष 2015 से भारत सरकार द्वारा अनुसंधान एवं विकास पारिस्थितिकी तंत्र को निरंतर प्रोत्साहन तथा विज्ञान-आधारित नई नीतियों के कारण यह प्रगति संभव हुई है।

- भारत की आकांक्षाएँ: भारत सरकार का लक्ष्य वैश्विक नवाचार सूचकांक में अग्रणी देशों की श्रेणी में स्थान प्राप्त करना है।
- सरकार अर्धचालक, कृत्रिम बुद्धिमत्ता तथा अंतरिक्ष जैसे रणनीतिक प्रौद्योगिकी क्षेत्रों में निवेश कर रही है।
- लगभग 10 अरब अमेरिकी डॉलर का अनुसंधान राष्ट्रीय अनुसंधान प्रतिष्ठान कोष विभिन्न शैक्षणिक एवं वैज्ञानिक क्षेत्रों में अनुसंधान एवं विकास वित्तपोषण को गति प्रदान करेग
भारत को किन क्षेत्रों में सुधार की आवश्यकता है?
- वैश्विक नवाचार सूचकांक की अन्य छह श्रेणियाँ सुधार की व्यापक संभावनाओं को दर्शाती हैं।
- ये श्रेणियाँ हैं—
- ज्ञान एवं प्रौद्योगिकी
- सृजनात्मक उत्पाद
- मानव पूंजी एवं अनुसंधान
- संस्थागत व्यवस्था
- अवसंरचना
- व्यावसायिक परिपक्वता
- इन छह में से पाँच श्रेणियों में भारत की रैंक उसकी समग्र 38वीं रैंक से नीचे है।
- इन क्षेत्रों में सुधार का प्रमुख आधार देश के अनुसंधान एवं विकास पारिस्थितिकी तंत्र की व्यावसायिक परिपक्वता को सुदृढ़ करना है।
- व्यावसायिक परिपक्वता श्रेणी के प्रमुख उपघटक: ज्ञान-कर्मी : ज्ञान-आधारित गतिविधियों में कार्यरत रोजगार के अनुपात का आकलन।
- नवाचार संबंध : सार्वजनिक एवं निजी अनुसंधान संस्थानों के बीच सहयोग का मूल्यांकन।
- ज्ञान अवशोषण : इसमें प्रत्यक्ष विदेशी निवेश, उच्च प्रौद्योगिकी आयात, सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी सेवाओं का आयात तथा बौद्धिक संपदा के उपयोग हेतु किए गए भुगतानों जैसे संकेतकों को कुल व्यापार के अनुपात में मापा जाता है।
समाधान अपेक्षित प्रमुख चिंताएँ
- पेटेंट आवेदन: केवल पेटेंट आवेदनों की संख्या बढ़ाना ही लक्ष्य नहीं होना चाहिए, यद्यपि इसका प्रभाव भारत की वैश्विक नवाचार सूचकांक रैंकिंग पर पड़ता है।
- भारत में स्वीकृत पेटेंटों तथा उच्च प्रभाव वाले पेटेंटों की संख्या बढ़ाना अगला साझा लक्ष्य होना चाहिए।
- प्रौद्योगिकीय नवाचार: भारत की आवश्यकताओं तथा सुरक्षा चुनौतियों के समाधान हेतु आवश्यक प्रौद्योगिकीय नवाचार देश के अपने अनुसंधान एवं विकास पारिस्थितिकी तंत्र से ही उत्पन्न होने चाहिए।
- विदेशी नवाचार भारत की सभी चुनौतियों का समाधान नहीं कर सकते।
- वित्तपोषण संबंधी सीमाएँ: सरकार के सुदृढ़ समर्थन के बावजूद भारत में अनुसंधान एवं विकास में निजी क्षेत्र का निवेश वैश्विक मानकों की तुलना में अभी भी सीमित है, जिससे बड़े स्तर पर नवाचार बाधित होता है।
- प्रतिभा संरक्षण की चुनौती: बेहतर अवसंरचना, वित्तपोषण तथा कैरियर अवसरों के कारण कुशल शोधकर्ताओं का विदेशों की ओर पलायन अभी भी जारी है।
- विश्वविद्यालय–उद्योग सहयोग का अभाव: शिक्षण संस्थानों एवं उद्योगों के बीच सीमित सहयोग अनुसंधान के व्यावसायीकरण में बाधा उत्पन्न करता है।
- कुशल मानव संसाधन की कमी: गहन प्रौद्योगिकी एवं बहुविषयक क्षेत्रों में प्रशिक्षित अनुसंधान एवं विकास विशेषज्ञों का अभाव बना हुआ है।
सरकार द्वारा उठाए गए प्रमुख कदम
- अनुसंधान, विकास एवं नवाचार योजना: 1 लाख करोड़ रुपये के कोष के साथ स्वीकृत इस योजना का उद्देश्य निजी क्षेत्र के अनुसंधान एवं विकास तथा गहन प्रौद्योगिकी आधारित नवाचार उद्यमों को प्रोत्साहित करना है।
- इसके अंतर्गत दीर्घकालिक, कम अथवा शून्य ब्याज ऋण, इक्विटी निवेश तथा अनुसंधान राष्ट्रीय अनुसंधान प्रतिष्ठान के माध्यम से गहन प्रौद्योगिकी कोष को वित्तपोषित किया जाएगा।
- अनुसंधान राष्ट्रीय अनुसंधान प्रतिष्ठान: वर्ष 2023 में स्थापित यह प्रतिष्ठान विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में अनुसंधान, नवाचार तथा उद्यमिता के लिए उच्च स्तरीय रणनीतिक दिशा प्रदान करता है।
- इसका लक्ष्य वर्ष 2023–28 के दौरान विभिन्न स्रोतों के माध्यम से 50,000 करोड़ रुपये एकत्रण करना है।
- राष्ट्रीय भू-स्थानिक नीति, 2022: इसका उद्देश्य वर्ष 2035 तक भारत को भू-स्थानिक क्षेत्र में वैश्विक अग्रणी बनाना है।
- यह नीति भू-स्थानिक आँकड़ों तक पहुँच को उदार बनाते हुए शासन, उद्योग तथा अनुसंधान में उनके उपयोग को बढ़ावा देती है।
- भारतीय अंतरिक्ष नीति, 2023: यह वर्ष 2020 में प्रारंभ किए गए अंतरिक्ष क्षेत्र के सुधारों पर आधारित है, जिनके माध्यम से गैर-सरकारी संस्थाओं को व्यापक भागीदारी प्रदान की गई।
- इसका उद्देश्य अंतरिक्ष क्षमताओं का विस्तार, वाणिज्यिक अंतरिक्ष उद्योग को बढ़ावा तथा सार्वजनिक एवं निजी क्षेत्र के बीच सहयोग को प्रोत्साहित करना है।
- राष्ट्रीय क्वांटम मिशन: वर्ष 2023–31 के लिए 6,003.65 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं।
- इसका उद्देश्य वैज्ञानिक एवं औद्योगिक अनुसंधान एवं विकास के माध्यम से क्वांटम प्रौद्योगिकियों का विकास करना है।
- जैव अर्थव्यवस्था, पर्यावरण एवं अभियांत्रिकी नीति, 2024: यह जैव-विनिर्माण एवं जैव-कृत्रिम बुद्धिमत्ता केंद्रों तथा राष्ट्रीय जैव-प्रौद्योगिकी निर्माण नेटवर्क की स्थापना को प्रोत्साहित करती है, जिससे प्रौद्योगिकी विकास एवं व्यावसायीकरण को गति मिले।
- राष्ट्रीय सुपरकंप्यूटिंग मिशन: वर्ष 2015 में प्रारंभ इस मिशन के माध्यम से विश्वविद्यालयों, अनुसंधान संस्थानों तथा सरकारी एजेंसियों को अत्याधुनिक सुपरकंप्यूटिंग प्रणालियों से सशक्त बनाया जा रहा है, जिन्हें राष्ट्रीय ज्ञान नेटवर्क से जोड़ा गया है।
- भारत अर्धचालक मिशन: वर्ष 2021 में स्थापित इस मिशन का उद्देश्य अर्धचालक एवं डिस्प्ले विनिर्माण का सुदृढ़ पारिस्थितिकी तंत्र विकसित करना है।
- भारत छह राज्यों में 10 अर्धचालक परियोजनाओं को स्वीकृति दे चुका है, जिनमें ओडिशा की पहली वाणिज्यिक सिलिकॉन कार्बाइड निर्माण सुविधा भी सम्मिलित है।
- भारत कृत्रिम बुद्धिमत्ता मिशन: यह मिशन “भारत में कृत्रिम बुद्धिमत्ता का विकास तथा भारत के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता का उपयोग” की परिकल्पना पर आधारित है।
- इसके अंतर्गत संगणन क्षमता को 10,000 ग्राफिक्स प्रसंस्करण इकाइयों के प्रारंभिक लक्ष्य से बढ़ाकर 38,000 ग्राफिक्स प्रसंस्करण इकाइयों तक पहुँचाया गया है, जिससे नवाचार उद्यमों, शोधकर्ताओं एवं उद्योगों को सुलभ कृत्रिम बुद्धिमत्ता अवसंरचना उपलब्ध हो सके।
- अटल नवाचार मिशन: इसका उद्देश्य विद्यार्थियों, नवाचार उद्यमों एवं उद्यमियों को सहयोग प्रदान कर बुनियादी स्तर पर नवाचार को बढ़ावा देना है।
- राष्ट्रीय उच्च उत्पादकता बीज मिशन: यह मिशन अनुसंधान पारिस्थितिकी तंत्र को सुदृढ़ करने तथा उच्च उत्पादकता, कीट-प्रतिरोधी एवं जलवायु-अनुकूल बीजों के विकास पर केंद्रित है।
- समुद्री शैवाल मिशन एवं सीखो और कमाओ कार्यक्रम: ये पहल महिला उद्यमियों को सशक्त बनाते हुए आर्थिक समावेशन को बढ़ावा देती हैं।
आगे की राह
- वैश्विक नवाचार सूचकांक के शीर्ष 10 देशों में स्थान प्राप्त करने के लिए भारत को विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी संबंधी अपनी नवाचार रणनीति में संरचनात्मक परिवर्तन करने होंगे।
- समग्र वैश्विक नवाचार सूचकांक रैंकिंग के आधारभूत प्रत्येक संकेतक में भारत के प्रदर्शन में सुधार आवश्यक है।
- नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र में व्यावसायिक परिपक्वता को सुदृढ़ किया जाना चाहिए।
- यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि घरेलू एवं स्वदेशी बौद्धिक संपदा के आवेदकों को अधिक प्रोत्साहन एवं प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त प्राप्त हो।
Source: ORF